कोरोना वायरस: वैज्ञानिकों का दावा, वुहान में कम मृत्यु दर का अंदेशा.


कोरोना वायरस के संक्रमण से मृत्यु दर को लेकर नई जानकारी सामने आई है। इस बीमारी के केंद्र वुहान (चीन) के आंकड़ों का नए सिरे से अध्ययन करने के बाद वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि वहां मृत्यु दर 1.4 फीसदी रही। पहले डब्ल्यूएचओ ने विशेषज्ञों के जरिए 3.4 फीसदी होने का दावा किया था। 

नए अध्ययन में दावा किया गया 

कि इसमें उन लोगों को शामिल नहीं किया गया था, जिनमें बीमारी के  लक्षण नहीं दिखाई देते हैं, लेकिन बाद में उनके संक्रमण की पुष्टि होती है। ऐसे मौके पर जब पूरी दुनिया इस बीमारी से जूझ रही है तो यह खबर थोड़ी राहत प्रदान करने वाली है। 

लक्षण नहीं दिखते

नेचर मेडिसिन में प्रकाशित शोध के अनुसार इस अध्ययन में 29 फरवरी तक रोगियों के आंकड़ों एवं मृत्यु के आंकड़ों को आधार माना गया। दरअसल, कोरोना संक्रमितों में कई बार बीमारी के लक्षण प्रकट नहीं होते हैं। ऐसे में वे लोग उपचार के लिए नहीं जाते हैं। उनकी पहचान मुश्किल होती है। 

हांगकांग विश्वविद्यालय ने ऐसे मामलों की पहचान की और उन्हें बाद में रोगियों की फेहरिस्त में जोड़ा गया। इसके बाद यह नतीजा निकाला गया कि बीमारी से होने वाली वास्तविक मृत्यु दर वुहान में पहले के नतीजों की तुलना में काफी कम थी। 

डब्ल्यूएचओ के विशेषज्ञों के अंतरराष्ट्रीय मिशन ने वुहान में मृत्यु दर के 5.8 फीसदी तक होने का दावा किया था और चीन में 3.4 फीसदी होने की बात कही थी। 

लॉकडाउन फायदेमंद  

देश में रविवार को जनता कफ्र्यू को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं। पर वुहान से जुड़े शोध में दावा किया गया कि लॉकडाउन से ही चीन बीमारी पर काबू पाने में सफल रहा। इससे दो फायदे हुए-बीमारी का फैलाव रुका और 65 फीसदी मामले जो पहले रिपोर्ट नहीं हो रहे थे, वे स्वास्थ्य विभाग की जानाकारी में आ गए। 

मृत्यु दर एक फीसदी के करीब रहेगी 

अमेरिका के हार्वर्ड विश्वविद्यालय के टीएच चैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के प्रोफेसर बेरी ब्लूम ने न्यू इग्लैंड जर्नल आफ मेडिसिन में प्रकाशित अपने शोध में कहा है कि यह दर एक फीसदी के आसपास रहने का अनुमान है। वे कहते है कि पर्याप्त जांच नहीं होने के कारण सभी संक्रमितों का पता नहीं चल पा रहा है तथा आरंभिक आंकड़े मृत्यु दर ऊंची बता रहे हैं। सभी संभावित रोगियों की जांच से उन लोगों को भी सामने लाया जा सकता है, जिनमें इसके लक्षण नहीं आते हैं, लेकिन वे बीमारी का प्रसार कर सकते हैं। ऐसे में दो फायदे हैं एक बीमारी का फैलाव रुकेगा। दूसरे, मृत्यु दर को लेकर सही तस्वीर सामने आएगी।